मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना ।

मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।।

तब तक अपने ना सही … ।

दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

आज दिनाँक 14-07-2017  है आज मुझे ऐसा ऐसा लगा की बारिश का मौसम आया है। क्योकि आज घर से निकलते ही बारिश की नन्ही नन्ही बूंदे ऊपर से निचे की और आ रही थी और में अपनी बाइक पे चला जा रहा था और ऐसा लग रहा था की ये पल कभी कत्म ना हो और में ऐसे ही चलता ही रहू। जिन्दगी में कुछ पल बहुत खाश होते है ऐसे पलो में से एक पल आज का दिन है। में बस भिगता ही चला जा रहा था ऐसा ख्याल भी मन में नहीं आया की में रुक जाऊ लेकिन मन तो कही और ही था बारिश में भिगने का और वो तो में कर ही रहा था। मुझे बहुत अच्छा लगता है बारिश में भिगना। में अपनी बाइक में चलते बस एक ही गाना गुन गुना रहा था। ये मौसम की बारिश, ये बारिश का पानी, ये पानी की बूंदे, तुझे ही तो ढूंढे, ये मिलने की ख्वाहिश, ये ख्वाहिश पुरानी, हो पूरी तुझी से, मेरी ये कहानी।  आसमान में बादल छाये हुये थे और में अकेला चला जा रहा था । जीवन में कभी कभी इतनी ख़ुशी मिलती ही की हम उस ख़ुशी को जाहिर नहीं कर पाते ऐसा ही कुछ हाल मेरा भी था । ये मौसम हमारे जीवन में कितनी सारी खुशिया भर देते है की हमे कोई गम याद ही नहीं रहता है।

 

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